अंदाज…

अंदाज़....हमने तुम्हारे रिश्ते निभाने के अंदाज़ देखे हैं निगाहों में जो बसाए हैं वो सुनहरे ख़्वाब देखे हैं बहारें जब भी मुस्कराई हैं पलकों में भीगी यादोंके बहते सैलाब देखे हैं चांदनी को रिझाने चांदके मोहक…
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उसने पत्थर पर कुछ लिखा , शरमा गई लहर, स्वीकार किया प्रेम

" लहर " (लघुकथा)  जैसे ही चंचल लहर मचलती साहिल पर आकर पल भर ठिठकती,उसका भीगा सौंदर्य साहिल के हृदय को छू लेता।    साहिल ने कई बार रेत पर अपना प्रणय निवेदन लिखा पर वह प्रेम की इबारत या तो पवन का वेग मिटा देता या लहर के स्पर्श…
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आप लड़ते रहो , मै सुलह करवाता रहूंगा, नोबल जो चाहिए

बचपन से मुझे लोगों के झगड़े सुलझाने का शौक है। हुआ यूं कि मैने गलती से कही पंचतंत्र की वो कहानी पढ़ ली थी। जिसमें एक बंदर दो बिल्लियों के झगड़े में दोनों के हिस्से की रोटी खा लेता है।आप लोगों ने उससे क्या सीख ली, मै नहीं जानता!…
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पहली नजर का धोखा

पता नहीं लोग क्यों कहते हैं कि पहली नजर में प्रेम हो जाता है। मैंने तो पहली, दूसरी, यहां तक कि सौवीं नजर तक कोशिश की है। पर अफसोस, प्रेम कभी नहीं हुआ। हां, एक-आध बार कंजक्टिवाइटिस ज़रूर हुआ है। साफ है, पहली नजर का प्रेम महज अफवाह है।…
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बेहद हसीन था वो पल…

कानों की बालियां ......जब जब तुम्हें देखा फूलों से कोई ख़्वाब सामहका थाबरसते सावन में आरजूओं का कारवांतुम्हारी ही यादों में जिया थानूर की बूंदें कानों कीबालियों में जो पहनी मैनेएक कतरा चांद का…
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टैरिफ की टकराहट में उलझा भारत-अमेरिकी व्यापार समझौता: क्या बनेगी बात ?

के.के.झा, इंदौर : 9 जुलाई 2025 तक जिस भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद थी, वह अब भी अधर में लटका है। यह सिर्फ एक समझौता नहीं, बल्कि दोनों लोकतंत्रों की नीतियों, प्राथमिकताओं और प्रतिबद्धताओं की परीक्षा है। भारत की…
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दिल…एक लघुकथा

दिल....    रात होते ही सारी दुनिया सपनों की सुनहरी दुनिया में खो गई।दिल ने देखा असंख्य तारे आसमान में झिलमिला रहे थे।रात की नीरवता में तारों को दिल की धड़कन स्पष्ट सुनाई दे रही थी।तारों ने टिमटिमाकर दिल का स्वागत किया।दिल भी…
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इंतजार …साजन का

इंतजार....अपने साजन का............…..............................यह खिड़की और बारिश की बूंदे।सरसती मदमस्त पवन।कब आओगे, मेरे साजन।तुमने कहा था ना, आओगे इस बार। सूना आंगन, सूने सूने मेरे नयन।कब आओगे ,मेरे साजन।…
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नदी ने सागर से पूछा – क्या तुम किसी की प्यास बुझा सकते हो..?

सागर ... एक लघुकथाइठलाती नदी झूमती,बलखाती बही जा रही थी।कल कल करता नदी का जल जैसे खुशी से छलछला रहा था।किनारे पर कभी वह पेड़ों को,लताओं को भिगोता तो कभी पनिहारिनो की मटकी में प्यास बुझाने का मीठा स्त्रोत बन जाता।    आज नदी…
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खामोश निगाहें और गुलाब पर बारिश की बूंदे

यादों का सिलसिला.....................तुमने मुझे जो सुर्ख गुलाबउपहार में दिया थावो उपहार नहींमेरी सांसों को महकतीयादों का सिलसिला दिया थावो सुर्ख गुलाबों की भीनी भीनी महक थीजो कविता की पुस्तक में गुलाबी…
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