उसने पत्थर पर कुछ लिखा , शरमा गई लहर, स्वीकार किया प्रेम

सुप्रसिद्ध कथाकार डॉ. रंजना फतेपुरकर की बेहतरीन लघुकथा

” लहर ” (लघुकथा)

  जैसे ही चंचल लहर मचलती साहिल पर आकर पल भर ठिठकती,उसका भीगा सौंदर्य साहिल के हृदय को छू लेता।

    साहिल ने कई बार रेत पर अपना प्रणय निवेदन लिखा पर वह प्रेम की इबारत या तो पवन का वेग मिटा देता या लहर के स्पर्श करते ही इबारत अनपढ़े ही बह जाती।

    आखिर उदास हो साहिल ने पास ही स्थित अपने मित्र पत्थर से पूछा–

    “ऐ मित्र! तुम्हीं बताओ मैं कैसे लहर से अपने प्रेम की अभिव्यक्ति करूं?”

    साहिल को यूं उदास देख पत्थर ने कहा–

    “साहिल! मेरे दोस्त …उदास न हो।रेत पर लिखी इबारत का अस्तित्व क्षण भर का ही होता है।तुम कोशिश करो और इबारत मेरे शरीर पर लिखो।पत्थर पर एक बार लिखी इबारत सदियों तक पढ़ी जा सकती है।”

    साहिल ने प्रयत्नों की पराकाष्ठा की और पत्थर पर लहर के नाम अपना प्रणय निवेदन लिख दिया।

    लहर आई और उसने रेत पर लहराते हुए साहिल को तो भिगोया ही साथ साथ पत्थर को भी भिगो दिया।लेकिन आज लहर ने पत्थर पर लिखे उस अमिट प्रणय निवेदन को पढ़ा और शरमा कर चूर चूर हो गई।उसने अपने चीर प्रतीक्षित प्रेम को स्वीकार किया और साहिल के प्रेम में डूब गई।

    साहिल और लहर के प्रणय के साक्षी बने पत्थर की मुस्कराहट भी 

इबारत की तरह अमिट हो गई थी।

– डॉ रंजना फतेपुरकर

(लेखक सुप्रसिद्ध कथाकार, रचनाकार डॉ. रंजना फतेपुरकर है )

 

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