दिल…एक लघुकथा

सुप्रसिद्ध कथाकार , कहानीकार, रचनाकार और साहित्यकार डॉ रंजना फतेपुरकर की लघुकथा

दिल….

    रात होते ही सारी दुनिया सपनों की सुनहरी दुनिया में खो गई।दिल ने देखा असंख्य तारे आसमान में झिलमिला रहे थे।रात की नीरवता में तारों को दिल की धड़कन स्पष्ट सुनाई दे रही थी।तारों ने टिमटिमाकर दिल का स्वागत किया।

दिल भी मुस्करा दिया और बोला …

    “प्यारे तारों,रात में तुम्हें झिलमिलाते देखना मुझे बहुत अच्छा लगता है।तुमने रात के सौंदर्य को कई गुना बढ़ा दिया है।पर दुःख होता है जब कोई तुम्हें टूटता हुआ देख अपनी हसरतों को पूरा करने तुमसे मन्नतें मांगने लगता है।”

    तारों ने कहा…

    “दिल,हमें टूटकर भी लोगों की हसरतें पूरी करने का सुख तो है।पर यह सोचकर ज्यादा दुःख होता है जब लोग तो अपनी हसरतें पूरी करने के लिए दिल ही तोड़ देते हैं….।”

( लेखिका इंदौर की सुप्रसिद्ध कथाकार , कहानीकार, रचनाकार और साहित्यकार डॉ रंजना फतेपुरकर है )

Leave A Reply

Your email address will not be published.