अंदाज…

अंदाज़….

हमने तुम्हारे रिश्ते निभाने के अंदाज़ देखे हैं 

निगाहों में जो बसाए हैं 

वो सुनहरे ख़्वाब देखे हैं 

बहारें जब भी मुस्कराई हैं 

पलकों में भीगी यादों

के बहते सैलाब देखे हैं 

चांदनी को रिझाने चांद

के मोहक अंदाज़ देखे हैं 

तनहा दिल को मनाने

गुलाबों के महकते अंदाज़ देखे हैं 

रात जब भी गुनगुनाई है 

सितारों के खूबसूरत

अंदाज़ देखे हैं 

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लेखक सुप्रसिद्ध रचनाकार, लघु कथाकार डॉ. रंजना फतेपुरकर है ।

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