बेहद हसीन था वो पल…

रंजना फतेपुरकर की शानदार पंक्तियां

कानों की बालियां ……

जब जब तुम्हें देखा 

फूलों से कोई ख़्वाब सा

महका था

बरसते सावन में आरजूओं का कारवां

तुम्हारी ही यादों में जिया 

था

नूर की बूंदें कानों की

बालियों में जो पहनी मैने

एक कतरा चांद का

तुम्हारी मुस्कानों पर बिखरा था

अंदाज़ तुम्हारी कशिश का यूं ही तो नहीं सबसे

जुदा था

तुम्हारी यादों में भीगा मन 

तुमसे ही यह कहता है 

बेहद हसीन था वो पल

जी तुम्हारी यादों से गुजरा था

डॉ. रंजना फतेपुरकर, इंदौर

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