इंतजार …साजन का

इंदौर की सुप्रसिद्ध साहित्यकार वंदना पुणतांबेकर की दिल को छू लेने वाली कविता

इंतजार….अपने साजन का

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यह खिड़की और बारिश की बूंदे।

सरसती मदमस्त पवन।कब आओगे, मेरे साजन।

तुमने कहा था ना, आओगे इस बार।

 सूना आंगन, सूने सूने मेरे नयन।

कब आओगे ,मेरे साजन।

वो बातें, वो वादे, कहां तो बहुत कुछ था, मैंने। 

पर सुना नहीं था ,कुछ भी तुमने।

तब भी डर से भीगा था, मेरा मन।

कब आओगे, मेरे साजन। 

अब ना इन चूड़ियों की खनक भर्ती है।

ना माथे की बिंदिया लुभाती है।

इंतजार कि यह बारिश बस।

एक कसक सी दिल में रह जाती है। 

कब आओगे ,मेरे साजन।

ख्वाब सजोया था, पहली बारिश में और तुम।

पत्तों पर बूंदों की रुनझुन।

उमड़ घुमड़कर आए हैं बदरा।

बूंदों के संग भीग रहे नयन।

कब आओगे मेरे साजन। 

( लेखक इंदौर की सुप्रसिद्ध साहित्यकार वंदना पुणतांबेकर है )

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