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साहित्यकार
अंदाज…
अंदाज़....हमने तुम्हारे रिश्ते निभाने के अंदाज़ देखे हैं निगाहों में जो बसाए हैं वो सुनहरे ख़्वाब देखे हैं बहारें जब भी मुस्कराई हैं पलकों में भीगी यादोंके बहते सैलाब देखे हैं चांदनी को रिझाने चांदके मोहक…
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…ओर चांद ने लिख दी चकोर के लिए इबारत
चाहत के गीत (लघुकथा) सितारों जड़े नीले अम्बर में पूर्णिमा का चांद झिलमिला रहा था।चांदनी भी अपना रुपहला घूंघट ओढ़े चांद के संग संग सितारों की राह पर चल रही थी।तभी उसने देखा चकोर चाहत का हौसला अपने पंखों में भर चांद को छूने के लिए…
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तुम्ही बताओ क्या रखूं तुम्हारा नाम..
धड़कन...लचकती शाखों पर खिलता गुलाब याद तुम्हारी दिलाता है सोचते हैं तुम्हारा नाम गुलाब रख दें पर डरते हैं शाम के ढलते ही तुम कहीं बिखर न जाओबदली में छुपा चांदयाद तुम्हारी दिलाता है सोचते हैं तुम्हारा नाम …
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दिल…एक लघुकथा
दिल.... रात होते ही सारी दुनिया सपनों की सुनहरी दुनिया में खो गई।दिल ने देखा असंख्य तारे आसमान में झिलमिला रहे थे।रात की नीरवता में तारों को दिल की धड़कन स्पष्ट सुनाई दे रही थी।तारों ने टिमटिमाकर दिल का स्वागत किया।दिल भी…
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इंतजार …साजन का
इंतजार....अपने साजन का............…..............................यह खिड़की और बारिश की बूंदे।सरसती मदमस्त पवन।कब आओगे, मेरे साजन।तुमने कहा था ना, आओगे इस बार। सूना आंगन, सूने सूने मेरे नयन।कब आओगे ,मेरे साजन।…
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नदी ने सागर से पूछा – क्या तुम किसी की प्यास बुझा सकते हो..?
सागर ... एक लघुकथाइठलाती नदी झूमती,बलखाती बही जा रही थी।कल कल करता नदी का जल जैसे खुशी से छलछला रहा था।किनारे पर कभी वह पेड़ों को,लताओं को भिगोता तो कभी पनिहारिनो की मटकी में प्यास बुझाने का मीठा स्त्रोत बन जाता। आज नदी…
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खामोश निगाहें और गुलाब पर बारिश की बूंदे
यादों का सिलसिला.....................तुमने मुझे जो सुर्ख गुलाबउपहार में दिया थावो उपहार नहींमेरी सांसों को महकतीयादों का सिलसिला दिया थावो सुर्ख गुलाबों की भीनी भीनी महक थीजो कविता की पुस्तक में गुलाबी…
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सृजन हमेशा वंदनीय – एक लघुकथा
सृजन - लघुकथा झील में हंस,हंसिनी के साथ अठखेलियां कर रहा था।कभी अपने भीगे पंखों से हंसिनी पर फुहारों की वर्षा करता तो कभी सोचता कमल पत्तों पर थिरकती ओस के मोतियों से हंसिनी का शृंगार करूं।लाल,गुलाबी,नीले कमल हंसों की जोड़ी देख…
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रिश्ता… एक अनोखी कविता
रिश्ता....तेरा मेरा रिश्ता है जन्मों का रिश्ता। रक्त से सिंचा,स्नेह से पाला ,ममता से दुलारा।कभी-कभी जब मैं खामोश हो जाती हूं। तेरे स्नेह भरे नयन सवाल करते। मेरी खामोशी में छुपे दर्द को पढ़ लिया करते। बस यूं ही…
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