लव जिहाद जैसी बीमारी जड़ से खत्म होना आवश्यक – ऋषभदेव जी महाराज

सुदामा जैसा मित्र नहीं , कृष्ण जैसा निभाने वाला नहीं - बोले ऋषभदेव जी महाराज

यह संसार स्वार्थ की – जरूरत खत्म ,रिश्ता खत्म – ऋषभदेव जी महाराज– सुदामा चरित्र जीवन की सच्चाईइंदौर ।मित्रता सबसे बड़ा धर्म है ।मित्रता करना तो आसान होता है लेकिन निभाना बड़ा मुश्किल । सुदामा जैसा कोई मित्र नहीं और कृष्ण जैसा मित्रता निभाने वाला कोई नहीं । सनातन धर्म की रक्षा और लव जिहाद को जड़ से खत्म करना बेहद आवश्यक है ।
यह कहना है कथा व्यास बाल व्यास ऋषभदेव जी महाराज का । महाराज राजेंद्र नगर स्थित टंकी हॉल में मिश्रा परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के अंतिम दिवस के अवसर पर भक्तों को संबोधित कर रहे थे ।कथा के अंतिम दिवस ऋषभदेव जी महाराज ने सुदामा चरित्र सहित कई पुराने प्रसंग सुनाए ।

ऋषभदेव जी महाराज ने कहा कि परमात्मा कहते है कि दो कदम मेरी तरह आगे बढ़ा , मै तेरी तरफ ना आ जाऊ तो कहना । ब्राह्मण का वास्तविक धन जनेऊ, धर्म, और संध्या माना जाता है ।

मित्र कितना भी बड़ा हो जाए लेकिन अपने मित्र के प्रति समर्पण होना चाहिए ।मित्र से केवल मित्र जैसा ही मिलना चाहिए ।

महाराज जी ने कहा कि गुरु आश्रम , धार्मिक आयोजन और पुत्री के ससुराल कभी खाली हाथ नहीं जाना चाहिए ।

महाराज जी ने केंद्र सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार धर्म और सनातन को लेकर काफी सक्रिय है । लव जिहाद को लेकर भी महाराज जी ने अपना आक्रोश व्यक्त किया ।उन्होंने कहा कि अपने बच्चों को सनातन धर्म के प्रति सक्रिय करवाना आज की जरूरत हो गई है ।
महाराज जी ने कहा कि कुछ लोग सनातन धर्म की बहन बेटियों को बहला फुसलाकर शोषण करते है और इस कर्म को सबाब मानते है ।इसी सोच वालो के खिलाफ सरकार को कड़ी से कड़ी कार्यवाही करना चाहिए ।लव जिहाद को खत्म करने के लिए सनातन धर्म के प्रति मजबूत होने की आवश्यकता है ।
महाराज जी ने कहा अभी परमात्मा की कथा कर लेना चाहिए क्योंकि अगला पल जीवन की व्यथा का शुरू होता है । जब समय मिले तब ही अच्छा काम कर लेना चाहिए ।क्योंकि अगला पल किसी को नहीं पता कि क्या होगा । महाराज जी ने कहा कि संसार में आना, रहना सरल है लेकिन संसार को समझना कठिन है ।

महाराज जी ने कहा कि कथा कितनी भी अच्छी हो , या पढ़ी जाए लेकिन जब तक सुनने वाला अच्छा नहीं हो तब तक कथा अधूरी रहती है ।
महाराज जी ने कहा कि आज स्वार्थ की दुनिया है जरूरत खत्म होने के बाद अपनो को ही भूल जाती है । ऋषभदेव जी महाराज ने नकटासुर वध का प्रसंग भी सुनाया । अभाव में भी प्रभाव होगा जब भक्ति में ईमानदारी होगी ।
मुख्य यजमान पूनम संजय मिश्रा ने व्यासपीठ पूजन किया ।

कथा में ,हम तुम्हारे है प्रभु जी , मनमोहना तुझे निहारूं , किशोरी तेरे बरसाने में , राधे तेरे चरणों की धूल मिल जाए , जैसे कई भजनों पर भक्त खूब झूमे । अंतिम दिवस में बड़ी संख्या में भक्त पहुंचे और भगवत कथा श्रवण करने का पुण्य अर्जित किया ।

इस अवसर पर पं. कल्याण्दत शास्त्री , प्रशांत बडवे , घनश्याम वैष्णव, संदीप जोशी , सुरेश चंद्र पांडे, नरेंद्र तिवारी ,संजय जारोलिया, देवेंद्र शर्मा, भगवती शर्मा, दीपक शर्मा, जी सन्नी शर्मा, सुभाष दुबे , लखन शर्मा, विशाल शर्मा, वीडी भार्गव , अंकित शर्मा, मोहित शर्मा, लीलाधर शर्मा,
मोनिका दुबे, मोनिका शर्मा, डिम्पल शर्मा, वर्षा शर्मा, पायल शर्मा, कविता तिवारी, उषा शुक्ला,दीपिका शर्मा , बिना शुक्ला , सीमा शुक्ला , , कविता मिश्रा, रश्मि पुरोहित, शीतल शर्मा, रिंकू तिवारी , निर्मला चौबे, गोविंद शर्मा, सुजीत शर्मा, अनिरुद्ध शर्मा सहित सैकडो भक्त मौजूद रहे ।

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