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डॉ.रंजना फतेपुरकर

किसी जरूरतमंद की मदद ही परमात्मा की सच्ची भक्ति है

सुबह सुबह अखबार की चटपटी खबरों पर नज़र डाल ही रही थी कि सुमी बाई ने परदे के पीछे से थोड़ा झांक कर पूछा–    "भाभी जी मैं हर महीने आपके पास जो रुपए जमा करती हूं मुझे आज चाहिए।"    "हां ले लो पर आज ऐसी क्या जरूरत पड़ गई?"     …
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अंदाज…

अंदाज़....हमने तुम्हारे रिश्ते निभाने के अंदाज़ देखे हैं निगाहों में जो बसाए हैं वो सुनहरे ख़्वाब देखे हैं बहारें जब भी मुस्कराई हैं पलकों में भीगी यादोंके बहते सैलाब देखे हैं चांदनी को रिझाने चांदके मोहक…
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…ओर चांद ने लिख दी चकोर के लिए इबारत

चाहत के गीत (लघुकथा)    सितारों जड़े नीले अम्बर में पूर्णिमा का चांद झिलमिला रहा था।चांदनी भी अपना रुपहला घूंघट ओढ़े चांद के संग संग सितारों की राह पर चल रही थी।तभी उसने देखा चकोर चाहत का हौसला अपने पंखों में भर चांद को छूने के लिए…
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उसने पत्थर पर कुछ लिखा , शरमा गई लहर, स्वीकार किया प्रेम

" लहर " (लघुकथा)  जैसे ही चंचल लहर मचलती साहिल पर आकर पल भर ठिठकती,उसका भीगा सौंदर्य साहिल के हृदय को छू लेता।    साहिल ने कई बार रेत पर अपना प्रणय निवेदन लिखा पर वह प्रेम की इबारत या तो पवन का वेग मिटा देता या लहर के स्पर्श…
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तुम्ही बताओ क्या रखूं तुम्हारा नाम..

धड़कन...लचकती शाखों पर खिलता गुलाब याद तुम्हारी दिलाता है सोचते हैं तुम्हारा नाम गुलाब रख दें पर डरते हैं शाम के ढलते ही तुम कहीं बिखर न जाओबदली में छुपा चांदयाद तुम्हारी दिलाता है सोचते हैं तुम्हारा नाम …
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बेहद हसीन था वो पल…

कानों की बालियां ......जब जब तुम्हें देखा फूलों से कोई ख़्वाब सामहका थाबरसते सावन में आरजूओं का कारवांतुम्हारी ही यादों में जिया थानूर की बूंदें कानों कीबालियों में जो पहनी मैनेएक कतरा चांद का…
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दिल…एक लघुकथा

दिल....    रात होते ही सारी दुनिया सपनों की सुनहरी दुनिया में खो गई।दिल ने देखा असंख्य तारे आसमान में झिलमिला रहे थे।रात की नीरवता में तारों को दिल की धड़कन स्पष्ट सुनाई दे रही थी।तारों ने टिमटिमाकर दिल का स्वागत किया।दिल भी…
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