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लघुकथा

किसी जरूरतमंद की मदद ही परमात्मा की सच्ची भक्ति है

सुबह सुबह अखबार की चटपटी खबरों पर नज़र डाल ही रही थी कि सुमी बाई ने परदे के पीछे से थोड़ा झांक कर पूछा–    "भाभी जी मैं हर महीने आपके पास जो रुपए जमा करती हूं मुझे आज चाहिए।"    "हां ले लो पर आज ऐसी क्या जरूरत पड़ गई?"     …
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…ओर चांद ने लिख दी चकोर के लिए इबारत

चाहत के गीत (लघुकथा)    सितारों जड़े नीले अम्बर में पूर्णिमा का चांद झिलमिला रहा था।चांदनी भी अपना रुपहला घूंघट ओढ़े चांद के संग संग सितारों की राह पर चल रही थी।तभी उसने देखा चकोर चाहत का हौसला अपने पंखों में भर चांद को छूने के लिए…
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तुम्ही बताओ क्या रखूं तुम्हारा नाम..

धड़कन...लचकती शाखों पर खिलता गुलाब याद तुम्हारी दिलाता है सोचते हैं तुम्हारा नाम गुलाब रख दें पर डरते हैं शाम के ढलते ही तुम कहीं बिखर न जाओबदली में छुपा चांदयाद तुम्हारी दिलाता है सोचते हैं तुम्हारा नाम …
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बेहद हसीन था वो पल…

कानों की बालियां ......जब जब तुम्हें देखा फूलों से कोई ख़्वाब सामहका थाबरसते सावन में आरजूओं का कारवांतुम्हारी ही यादों में जिया थानूर की बूंदें कानों कीबालियों में जो पहनी मैनेएक कतरा चांद का…
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दिल…एक लघुकथा

दिल....    रात होते ही सारी दुनिया सपनों की सुनहरी दुनिया में खो गई।दिल ने देखा असंख्य तारे आसमान में झिलमिला रहे थे।रात की नीरवता में तारों को दिल की धड़कन स्पष्ट सुनाई दे रही थी।तारों ने टिमटिमाकर दिल का स्वागत किया।दिल भी…
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नदी ने सागर से पूछा – क्या तुम किसी की प्यास बुझा सकते हो..?

सागर ... एक लघुकथाइठलाती नदी झूमती,बलखाती बही जा रही थी।कल कल करता नदी का जल जैसे खुशी से छलछला रहा था।किनारे पर कभी वह पेड़ों को,लताओं को भिगोता तो कभी पनिहारिनो की मटकी में प्यास बुझाने का मीठा स्त्रोत बन जाता।    आज नदी…
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सृजन हमेशा वंदनीय – एक लघुकथा

सृजन - लघुकथा    झील में हंस,हंसिनी के साथ अठखेलियां कर रहा था।कभी अपने भीगे पंखों से हंसिनी पर फुहारों की वर्षा करता तो कभी सोचता कमल पत्तों पर थिरकती ओस के मोतियों से हंसिनी का शृंगार करूं।लाल,गुलाबी,नीले कमल हंसों की जोड़ी देख…
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