बेल्जियम की एक घटना ने आवाज-संचालित रोबोटिक असिस्टेंट को लेकर बढ़ती निजता की चिंता उजागर की है। एक ठेकेदार ने गूगल असिस्टेंट पर दर्ज 1,000 से अधिक ऑडियो रिकॉर्डिंग सार्वजनिक प्रसारक वीआरटी को भेज दीं। इन रिकॉर्डिंग में लोगों की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के साथ ही उनकी पहचान सुनिश्चित करने वाले कुछ निजी आंकड़े भी थे। इनमें से 153 बातचीत तो रिकॉर्ड ही नहीं होनी चाहिए थीं क्योंकि उनके लिए उपभोक्ताओं ने ओके गूगल की मंजूरी नहीं दी थी। गूगल ने इस मामले में अपने आधिकारिक ब्लॉग पर कहा है कि ये रिकॉर्डिंग अनाम रूप में कूटबद्ध की गई थीं ताकि विशेषज्ञ विश्लेषण कर वर्चुअल असिस्टेंट को अधिक स्मार्ट बना सकें। यह समस्या इतनी जल्दी नहीं खत्म होगी। गूगल असिस्टेंट, ऐपल के सिरी और एमेजॉन के एलेक्सा का इस्तेमाल दुनिया भर में एक अरब से भी अधिक लोग करते हैं। ये वॉयस असिस्टेंट कई मायनों में हमारी जिंदगी आसान बनाते हैं। उनका वजूद अपने आप में मशीन लर्निंग की जीत दिखाता है। लेकिन उन्हें भारी भरकम डेटा के जरिये प्रशिक्षित किए जाने की जरूरत है। इसीलिए बातचीत रिकॉर्ड की जाती है। असिस्टेंट का प्रदर्शन सुधारने के लिए उन बातचीत को लोगों की टीम सुनती हैं और असिस्टेंट को ये संवाद अशुद्धियां होते हुए भी समझने में मदद करती हैं। भले ही वॉयस असिस्टेंट पर होने वालीं बातचीत गुमनाम होती हैं लेकिन यह अपने-आप में निजता में दखल देने वाली बात है। एक बातचीत में कई संवेदनशील निजी जानकारियां होती हैं और उनसे उस शख्स की पहचान एवं भौगोलिक स्थिति भी पता चल जाती है। इस प्रकरण में यह बात भी सामने आई कि ये असिस्टेंट अचानक ऑन होकर बातचीत रिकॉर्ड कर सकते हैं। एमेजॉन के असिस्टेंट एलेक्सा के साथ भी यही होता है। उपयोगकर्ता एलेक्सा पर हुई बातचीत के ब्योरे दोबारा प्ले कर सकता है और कुछ फ्रीक्वेंसी पर रिकॉर्डिंग की यह गलती घटित होती है। जब कोई व्यक्ति वेकअप शब्द बोलता है तो उसकी प्रोसेसिंग गलत हो जाती है। कभी-कभार सामान्य बातचीत या पृष्ठभूमि से आने वाली आवाज को भी मशीन वेकअप शब्द के तौर पर सुन लेती है। दरअसल किसी डिजिटल असिस्टेंट में एक माइक्रोफोन भी शामिल होता है जो हमेशा ऑन रहता है और बातें सुनता रहता है। इस प्रोग्राम में रिकॉर्डिंग केवल तभी शुरू करने का प्रावधान है जब वेकअप बोला जाए। लेकिन माइक्रोफोन हमेशा चालू रहता है। अगर फोन में इसे शुरू करने के लिए एक पुश स्विच होता तो भी उपयोगकर्ता इस माइक को हमेशा ऑन ही रखते क्योंकि यह उसके काम करने के लिए बुनियादी चीज है।
इस तरह यह प्रोग्राम गलती से भी शुरू हो सकता है और यह उपयोगकर्ता के नियंत्रण में नहीं होता है। उन रिकॉर्डिंग को विश्लेषण के लिए मदर सर्वर के पास भेज दिया जाता है। इससे असिस्टेंट का प्रदर्शन सुधारने में मदद मिलती है और ऐसी तकनीक के विकास के लिए यह अहम भी है। लेकिन यह प्रक्रिया असुरक्षित है। इन रिकॉर्डिंग की प्रतिलिपि तैयार करने एवं विश्लेषण के लिए चुने गए ठेकेदार गोपनीयता खंडित कर सकते हैं। अगर सर्वर हैक कर लिया गया तो यह पूरा डेटा गलत हाथों में पड़ सकता है। रिकॉर्डिंग को गुमनाम ढंग से दर्ज करने से डिजिटल असिस्टेंट का प्रदर्शन खराब हो सकता है। यही वजह है कि गूगल असिस्टेंट और एलेक्सा की तुलना में ऐपल के सिरी असिस्टेंट के पिछड़ जाने की शिकायत का ताल्लुक इस गुमनामी से ही है। सिरी काफी हद तक रिकॉर्डिंग को गुमनाम रखता है। इन आंकड़ों का मानव विश्लेषण भी केवल तभी होता है जब किसी खास संवाद की पहचान के लिए बेतरतीब टैग लगा हो। लेकिन इसके चलते सिरी अपने उपयोगकर्ताओं की निजी पसंद एवं मिजाज को नहीं भाप पाता है। एमेजॉन और गूगल अपने वॉयस असिस्टेंट पर दर्ज गतिविधियों को इस तरह बेचती हैं कि वे उन्हें पूरी तरह गुमनाम बनाने से हिचकती हैं। ये कंपनियां ऑनलाइन सर्च और ऑनलाइन खरीदारी, मनोरंजक सामग्रियों की पसंद, चिकित्सकीय स्थिति, फोन कॉल और लिखित संदेशों की प्रवृत्तियों के बारे में जानने के लिए बड़े पैमाने पर डेटा विश्लेषण कराती हैं। यहां तक कि ये डिजिटल असिस्टेंट अपने उपयोगकर्ता की आवाज के लहजे से उसकी मनोदशा एवं मानसिक स्थिति के बारे में भी सटीक अंदाजा लगा सकते हैं। इस विश्लेषण की मदद से मुकम्मल प्रोफाइल तैयार करने में मदद मिलती है जिसे लक्षित मार्केटिंग एवं निजीकृत विज्ञापन अभियान चलाने में इस्तेमाल किया जा सकता है। जब एमेजॉन आपको आपकी पसंद के टीवी शो, फिल्में, संगीत एवं किताबों के बारे में पेशकश करता है तो आपको ये सब जादू सरीखा लगता है। इसी तरह गूगल भी उन पर्यटक स्थलों के बारे में विज्ञापन दिखाने लगता है जहां के लिए आप रुचि दिखा चुके हैं। असल में, आपकी ऑनलाइन गतिविधियों के रुझान एवं असिस्टेंट के साथ आपकी सक्रियता के विश्लेषण से यह संभव हो पाता है। किन इस सुविधा की कीमत भी चुकानी पड़ती है। उपयोगकर्ताओं को अपनी निजता गंवाने और सुविधा के बीच संतुलन साधने की जरूरत है। इसका मतलब होगा कि असिस्टेंट सेवा देने वाली कंपनी व्यापक स्तर पर पारदर्शिता दिखाए और उपयोगकर्ता से संबंधित डेटा पर उसका नियंत्रण हो। लेकिन दुर्भाग्य से, अधिकांश देशों में ऐसा कर पाने वाले कानून नहीं हैं। यूरोपीय संघ का सामान्य डेटा संरक्षण नियमन इस दिशा में अग्रदूत की भूमिका निभा रहा है लेकिन अधिकांश देशों में इतना सशक्त निजता कानून नहीं है। नतीजतन ऐसी सेवाएं देने वाली कंपनियां ही यह तय करती हैं कि वे लोगों की निजता का कितना ध्यान रखेंगी? आतंकी राय के इस डिजिटल संस्करण में आपको केवल बिग बॉस ही नहीं देख रहे हैं।