गर्मी ही जीवन को जीवन देती है – एसएन मंगल

ग्रीष्म ऋतु गुणगान और पर्यावरण चिंतारत साहित्य गोष्ठी

प्रयास न्यूज,,इंदौर। पर्यावरण संरक्षण अनुसंधान एवं विकास केंद्र (सीईपीआरडी) की साहित्य गोष्ठी ने जहां ग्रीष्म की उष्णता को काव्य के माध्यम से शीतलता प्रदान की, वहीं समसामयिक संदर्भों को भी भलीभांति रेखांकित किया।लं

बी अस्वस्थता पश्चात उपस्थित हुवे संस्था सचिव डॉ. रमेश मंगल द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर गोष्ठी का शुभारंभ किया। डॉ. स्वाति सिंह द्वारा सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई। संस्था के डॉ. दिलीप वागेला ने सभी की ओर से डॉ. मंगल का स्वागत कर उनके पूर्ण स्वस्थ होने की कामना की।

डॉ. ढोबले की मार्मिक कविता “पथिक” की प्रस्तुति के पश्चात, राज संधेलिया ने विषय को भली-भांति स्वर दिया- “चांटे मारे धूप में पवन प्रलय मचाए, राहगीर पर तरस खा बरगद पास बुलाए”। महेंद्र सांघी ने जोरदार पंक्तियां पढ़ी “काश देश में ऐसी सरकार आए, मुफ्त राशन के लिए एक पेड़ की शर्त लगाए”। सुनील मुसाफिर ने मधुर गजल गाई – “जमीन से उल्फत नहीं किसी को, सितारों पर लोग जाने लगे हैं”।

ओम उपाध्याय का शेर था – “उम्मीद रखी हमसे वफा कितनी, बेवफाई मगर मिली उनसे कितनी”। श्रीमती महिमा दवे ने हास्य रचना द्वारा कटाक्ष किया- “मुझे नहीं है कुर्सी का क्रेज, गुड़ खा गुलगुले से परहेज”। भीम सिंह पवार ने भी व्यंग्य कसा- “अपने बंगले को बना शिमला, रजाई गद्दे में सोते हो “। बृजेंद्र नागर की विशिष्ट शब्द रचना थी- “प्रकृति भले ही कल-कल करें, हमें तो आज चाहिए”।  

सुश्री पूजा कृष्णा ने सूर्य से प्रार्थना की- “अपनी ज्वाला आप समेटो थोड़ा, शीतल हो जाओ”। सुधीर ‘अपेक्षित’ का कथन था- “रक्त हो गरम मगर मस्तिष्क हो ठंडा”। डॉ. स्वाति सिंह ने अपनी कविता “सब कुछ बिकता है, यहां जान सस्ती लगती है” प्रस्तुत की। राम नगीना ने रहस्य बिखेरा- “दीवारों के कान हैं कान से सुनते बहरे लोग”। डॉ. संगीता भरूका ने प्रो. मंगल को श्रद्धा प्रकट की- “शत-शत नमन है आपको”।

राष्ट्रीय कवि सम्मेलनों से प्रसिद्धि प्राप्त श्री कमलेश दवे ने दाद बटोरी- “चीन मुर्गी पाकिस्तान अंडा, उस पर फहरा दो तिरंगा झंडा”। राजेंद्र सिंह, जो पेड़ मित्र कहे जाते हैं, ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपने विचार रखें। इस अवसर पर कमल कासलीवाल भी उपस्थित थे। एसएन मंगल ने एक व्यंग्य रचना पड़ी- “नेता तू जल्दी-जल्दी चल, जल्दी-जल्दी चलकर, तू जल्दी दल बदल”। गर्मी को बहुजन समाज हितैषी बताते हुए- “प्यारी गर्मी, प्यारी गर्मी, मेरी प्यारी प्यारी गर्मी” रचना सुनाकर खूब तालियां बटोरी।गो

ष्ठी का संचालक एवं संयोजन सत्यनारायण मंगल ने किया व आभार माना दिनेश जिंदल ने।

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