पर्यावरण अनुकूल राखियों का करें निर्माण
रक्षाबंधन पर सीईपीआरडी ने पौधों की रक्षा के लिए रक्षा सूत्र का चलाया अभियान

– पेड़ों की रक्षा करने के लिए रक्षा सूत्र का संकल्प लेने की अपील
प्रयास न्यूज, इंदौर । सीईपीआरडी के डॉ. अनिल भंडारी एवं डॉ. रमेश मंगल ने रक्षाबंधन के पर्व पर सभी नागरिकों से अपील की है कि वे पर्यावरण की रक्षा के संकल्प के साथ रक्षाबंधन पर मनावे। इस अवसर पर सभी पर्यावरणविदों ने सीईपीआरडी कार्यालय पर रक्षा सूत्र बांधकर पेड़ों की रक्षा करने का वचन दिया।
डॉ. अनिल भंडारी ने कहा कि वर्तमान में कई जगह राखी में प्लास्टिक तथा अन्य अपशिष्ट पदार्थ का उपयोग हो रहा है। यह पर्यावरण के हित के खिलाफ है। पर्यावरण को बचाने के लिए अंधाधुंध वृक्षों की कटाई को रोकना होगा इसके लिए इस रक्षाबंधन पर प्रत्येक नागरिक को पेड़ों पर रक्षा सूत्र बांधकर उनकी रक्षा का संकल्प लेना चाहिए।
पर्यावरण विद् डॉ. ओपी जोशी का कहना है कि “पेड़ों को राखी बांधने का विचार, और वह भी रक्षा बंधन से पहले, महत्वपूर्ण है। इस रक्षाबंधन को स्व प्रेरणा से वृक्ष-बंधन के रूप में संकल्प के साथ मनाना चाहिए।
सीईपीआरडी के उपाध्यक्ष डॉ. संदीप नारूलकर ने कहा- पर्यावरण जागरूकता के युग में त्योहारों को पर्यावरण-अनुकूल तरीके से मनाना एक लक्ष्य बन गया है। पर्यावरण अनुकूल तकनीकों का उपयोग करके राखियां बनाएं। बाज़ारों में बिकने वाली पारंपरिक राखियों में अक्सर ऐसी सामग्रियाँ होती हैं जो पर्यावरण के अनुकूल नहीं होती हैं, जो अपशिष्ट और प्रदूषण में योगदान करती हैं। सावधानी से बनाई गई हस्तनिर्मित राखियाँ न केवल भाई-बहनों के बीच के शाश्वत बंधन को दर्शाती हैं, बल्कि पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।
सीईपीआरडी कॉलोनी सेल के संयोजक एस एन गोयल ने कहा कि प्रत्येक कॉलोनी में हम वृक्षारोपण का अभियान चला रहे हैं। इसी के साथ रक्षाबंधन की अवसर पर पेड़ों की आरती उतार कर पेड़ों पर रक्षा कवच बांधे। यदि रक्षा कवच वाले पेड़ों पर कोई अवैध कटाई करता है तो उसके लिए तत्काल कार्यवाही करने के लिए कृत संकल्प होवे।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं पर्यावरण विद् डॉ. दिलीप वागेला ने कहा, “ग्लोबल वार्मिंग और वायु प्रदूषण की समस्या का पर पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, जिसके कारण दुनिया में बाढ़, तापमान में वृद्धि और अप्रत्याशित प्राकृतिक घटनाएं घट रही हैं।” अत: यह आवश्यक है कि प्रगति और पर्यावरण की रक्षा के बीच संतुलन होना चाहिए और इन पेड़ों को बंधन बांध कर उनकी सुरक्षा का वादा बेहतर तरीके से करना चाहिए।
सीईपीआरडी की महिला विंग की डॉ संगीता भारुका ने सभी बहनों से विशेष निवेदन किया है कि जब वे अपने भाई को राखी बांधे तो एक राखी पेड़ों के नाम की भी बांधे तथा उनसे पेड़ की रक्षा का वचन भी लेवें।
शैक्षणिक सेल के संयोजक डॉ. सुहाष धांडे ने सभी महाविद्यालय से यह अपील की है कि वे अपने महाविद्यालय में छात्रों को रक्षाबंधन पर पेड़ों की रक्षा का संकल्प पत्र भरावें। तने पर राखी बांधने के साथ तिलक भी लगावें।
पर्यावरण विद राजेंद्र सिंह बताते हैं कि शहर में
लगातार कई जगह पेड़ों को बड़ी बेरहमी से काटने की जानकारी प्राप्त हो रही है। हम एक और हरियाली की बात कर रहे हैं, पौधे लगा रहे हैं और दूसरी बार कुछ पर्यावरण के विरोधी वृक्षों की अवैध कटाई कर रहे हैं। रक्षाबंधन के पावन अवसर पर प्रत्येक कॉलोनी में इसका माहौल वातावरण बनाया जावे और अपने घर के सामने वृक्ष को राखी बांधी जावे।
