नीरज की आंखे दे गई जरूरतमंद को नई रोशनी
नीरज ने अपनी दोनो आंखे दान की जताई थी इच्छा

नवीन बारचे , कसरावद। बहती हवा सा था वो , उड़ती पतंग सा था वो , कहां गया उसे ढूंढो… अपने कर्मो से सबको अपना बनाने वाला नीरज जोशी अब इस दुनिया से विदा हो गया है । समाज को हमेशा नई दिशा नई सोच देने वाला नीरज अब बहुत दूर चला गया है ।
दुनिया से तो चला गया लेकिन अपनी आंखों को उन्हें दे गया जिनकी दुनिया अंधेरे में थी ,उनकी जिंदगी में रोशनी दे गया । वह कहता था जीवन मे है तब तक नेक कर्म करते रहो और जब दुनिया से जाओ तो अंग दान करो आँखे दान करो …उसका शरीर तो बीमारी के रोग से कोई काम का नही रहा था पर उसके बेटे राघव ओर साले दीपक ने नीरज की पूर्व इच्छा अनुसार दोनो आँखे दान कर दी । नीरज की दो आँखों से जिन लोगों को रोशनी मिलेगी … वे सोभायशाली होंगे…

कहते है न जो किया हुआ रहता सब यही दिखता है नीरज के सद्कर्म ऐसे रहे कि शरीर पंच तत्व में विलीन हो गया और नीरज की आँखें दुनिया मे रह गई जो किसी जरूरतमंद कोो नई रोशनी देकर रास्ता दिखाएगी । उसी नई रोशनी में नीरज की रोशनी समाज मे नजर आएगी रोशनी तो नीरज की रहेगी जो सब देखेगी पर हमारा नीरज नही दिखेगा…
तुम बहुत याद आओगे नीरज...
