बारिश से डर नहीं लगता साब , जिम्मेदारो की लापरवाही से लगता है
पहली बारिश में ही इंदौर हुआ जलमग्न, आम जनता में रोष

देखना एक दिन पूरा इंदौर शहर पानी में डूब जाएगा…
लेकिन जिम्मेदार शर्म से नहीं डूबेंगे…
देखना एक दिन ऐसा आएगा जब पूरा इंदौर शहर पानी में डूब जाएगा…
सड़कें नदी बन जाएँगी,
चौराहे तालाब बन जाएँगे,
और कॉलोनियाँ द्वीपों में बदल जाएँगी..
लेकिन जो लोग इस व्यवस्था के जिम्मेदार हैं,
वे तब भी नहीं डूबेंगे…
क्योंकि उन्हें शर्म से डूबना आता ही नहीं,
जब शहर का नागरिक अपनी छत पर खड़ा होकर मदद की गुहार लगा रहा होगा,
तब जिम्मेदार अधिकारी वातानुकूलित कमरों में “आपातकालीन समीक्षा बैठक” कर रहे होंगे।
बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी,
प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद फोटो सेशन होगा,
और फोटो सेशन के बाद सोशल मीडिया पर पोस्ट आएगी
“माननीय अधिकारियों ने जलभराव की स्थिति का गंभीरता से संज्ञान लिया।”
शहर डूब रहा होगा,
लेकिन फाइलें तैरती रहेंगी…
कुछ जनप्रतिनिधि नाव में बैठकर निरीक्षण करेंगे,
कुछ कैमरे के सामने पैंट मोड़कर पानी में उतरेंगे,
और कुछ वीडियो बनाकर बताएँगे कि “स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है”
नागरिक सोचता रह जाएगा कि अगर यही नियंत्रण है,
तो फिर अनियंत्रित स्थिति कैसी होती होगी ??
हर साल बारिश आएगी,
हर साल सड़कें टूटेंगी,
हर साल नाले उफनेंगे,
और हर साल वही पुराना बयान सुनाई देगा,
“इतनी बारिश की उम्मीद नहीं थी”
मानो बारिश ने भी नगर निगम को बिना सूचना दिए आने की गलती कर दी हो…
करोड़ों रुपये की योजनाएँ बनेंगी,
अरबों के बजट पास होंगे,
टेंडर निकलेंगे,
शिलान्यास होंगे,
उद्धघाटन होंगे,
लेकिन पहली तेज बारिश के बाद सच्चाई पानी के साथ सड़कों पर तैरती हुई दिखाई देगी।
फिर एक नई समिति बनेगी,
एक नई जांच होगी,
एक नई रिपोर्ट तैयार होगी,
और उस रिपोर्ट को रखने के लिए एक नई अलमारी खरीदी जाएगी..
क्योंकि हमारे यहाँ समस्याओं का समाधान कम और उनका दस्तावेजीकरण अधिक किया जाता है
इंदौर की जनता भी अद्भुत है
कुछ दिन गुस्सा करेगी,
सोशल मीडिया पर पोस्ट डालेगी,
फिर पानी उतरने के साथ-साथ गुस्सा भी उतर जाएगा,
और जिम्मेदार लोग आश्वस्त हो जाएँगे कि अगली बारिश तक सब कुछ सामान्य है,
इसलिए डर पानी से नहीं लगता,
डर उस व्यवस्था से लगता है
जो हर साल डूबती है,
लेकिन कभी सीखती नहीं…
डर उस मानसिकता से लगता है
जो जिम्मेदारी को पद समझती है,
कर्तव्य नहीं।
देखना एक दिन पूरा इंदौर शहर पानी में डूब जाएगा…
लेकिन अफसोस,
तब भी जिम्मेदार लोग शर्म से नहीं डूबेंगे…
( लेखक इंदौर के सुप्रसिद्ध निष्पक्ष लेखक देवेंद्र चौहान है )
