लक्ष्मी तत्व की जागृति से संतोष प्राप्त होता है गृहलक्ष्मी परिवार की देवी है

मनुष्य के भीतर ही सारा विश्व समाया हुआ है। हमारे पेट में ही संतोष, शांति और समाधान का स्थान है जिसे योग शास्त्र में नाभि चक्र कहा जाता है । इसमें साक्षात लक्ष्मी विष्णु जी विराजमान हैं। आत्म साक्षात्कार प्राप्त कर जब हम नियमित सहजयोग ध्यान करते हैं तो हमारा यह तत्व जागृत एवं विकसित होता है।

“परमात्मा ने लक्ष्मी को एक स्त्री स्वरूप.. एक माँ स्वरूप बनाया हुआ है! एक कमल पर लक्ष्मीजी ख़डी हो जाती है,सोचिये की एक कमल पर खड़ा होना माने आदमी मे कितनी सादगी होनी चाहिए!बिलकुल हल्का उसमे कोई दोष ना हो! जब आपके अंदर लक्ष्मी तत्व जागृत हो जाता है,तो पहली चीज आती है संतोष- जब तक संतोष नहीं आएगा हम किसी चीज का मजा नहीं उठा सकते! क्योंकि संतोष जो है,वो वर्तमान की चीज है लक्ष्मी जी हमारी नाभि मे निवास करती और उसके संतुष्ट होने पर ही महालक्ष्मी तत्व जागृत होता है! गृहलक्ष्मी परिवार की देवी है! परिवार के देवता का निवास यदि आपके अंदर है! तभी आप गृहलक्ष्मीयाँ है अन्यथा नहीं!”
परमपूज्य श्री माताजी निर्मला देवी जी के वर्ष 2004 में दिए एक प्रवचन से साभार

लक्ष्मी तत्व के साथ सभी तत्वों का आनंद लाभ कुंडलिनी जागरण एवं ध्यान करते हुवे प्राप्त किया जा सकता है। सहजायोगा डॉट ओआरजी डॉट इन ऑनलाइन साइट देखकर एवं टोल फ्री नंबर 1800 270 080 पर कॉल कर।

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