इंदौर में पूर्व विधायक ने भाजपा नगर अध्यक्ष को उठा दिया कुर्सी से

- सुमित मिश्रा की जगह गौरव रणदीवे होते तो क्या होता...? - कई तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म

ओर चली गई कुर्सी….

अभी तो यह शुरुआत है अध्यक्ष जी...

आदित्य उपाध्याय , इंदौर ।भारतीय जनता पार्टी में कहने को अपने वरिष्ठजनों के लिए बहुत ही आत्मसम्मान होता है , श्रीमान , भाईसाहब, और नाम के साथ जी लगाने की परंपरा भी भाजपा की सकारात्मक पहचान मानी जाती है । भाजपा संगठन का प्रमुख जैसे राष्ट्रीय अध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष, नगर अध्यक्ष और जिला अध्यक्ष , अपना अलग ही वर्चस्व और प्रोटोकॉल रखते है ।प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री भी इन संगठन प्रमुखों का सम्मान करने में पीछे नहीं रहते ।लेकिन इंदौर में कुछ अलग ही चल रहा है।सबसे अंत में नगर अध्यक्ष की घोषणा होने बाद से भाजपा संगठन में खींचतान देखने को मिल रही है ।कोई पर्दे के पीछे से अपना काम दिखा रहा है तो कोई सार्वजनिक मंच से । लेकिन खींचतान से कोई इंकार नहीं कर सकता ।ऐसा ही नजारा इंदौर में महिला कुश्ती के दौरान देखने को मिला जहां भाजपा संगठन के इंदौर प्रमुख नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा को प्रथम पंक्ति में मिली कुर्सी छोड़कर सबसे पीछे जाकर बैठने की व्यवस्था खुद को ही करनी पड़ी ।

ऐसा क्यों हुआ यह तो पता नहीं लेकिन मिश्रा को अपनी मेहनत से मिली नगर अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर भविष्य में भी सतर्क रहने की सीख यह घटना से लेनी चाहिए। 

हालांकि ,सुमित मिश्रा , पीछे बैठने का आदेश देने वाले पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय का सम्मान करते हुए बिना कुछ कहे अपनी कुर्सी किसी ओर को देते हुए पीछे रवाना हुए, ओर यह भी तय नहीं की पीछे उन्हें कुर्सी मिली या खड़े खड़े ही कुश्ती देखने का आनंद लिया ।

पिछले दिनों नगर निगम कर्मचारी पर क्रिकेट बैट लेकर मारने वाले पूर्व विधायक आकाश विजयवरीय का एक और कारनामा चर्चा में बन गया जिसमें उन्होंने सार्वजनिक मंच से नगर अध्यक्ष को कुर्सी छोड़ने की बात कही । यह घटना राजनीतिक गलियारों में आग की तरह फैल रही है ।

बहरहाल, अपने भाजपा संगठन के नगर अध्यक्ष को इस तरह पीछे बैठने को लेकर आकाश विजयवर्गीय की क्या मानसिकता रही होगी यह तो वे ही जाने लेकिन भाजपा इंदौर नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा इस दौरान असहाय नजर जरूर आए और आते भी क्यों नहीं , मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के पुत्र ने जो आदेश दिया वह स्वीकार करना भी तो जरूरी है , अन्यथा…

वही , दूसरी और एक बात की भी चर्चा है कि यदि सुमित मिश्रा के स्थान पर गौरव रणदीवे होते तो क्या ऐसी घटना होती… और यदि हो भी जाती तो उसके बाद क्या होता....

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