महिलाओं के नेगेटिव किरदारों से पड़ रहा है समाज पर गलत असर

महिलाओं का सशक्त होना एक उज्जवल भविष्य की ओर संकेत करता है। “आज की नारी सब पर भारी” वाली कहावत यथार्थ होती दिख रही है चाहे शहर हो या फिर गाँव की पगडंडिया भी आधुनिक रास्ते पर चलती दिख रही है।प्रत्येक युग एक बदलाब लेकर आता है।लेकिन किसी सोच या वस्तु की अति पतन के पथ की ओर ही अग्रसित करती है।
गाँव की पगडंडियों पर भी आजकल मोटरसाइकिल चलाती
युवतियां गांव में सहज ही नजर आ जाती है वैसे तो यह एक अच्छा संकेत है कि नारी अब चार दीवारों से निकलकर लड़कों के साथ हर उस जगह पर दिखाई दे रही है जहां शायद नारियों को निषेध माना जाता है।
हम प्रगति के पथ पर अग्रसर तो हो रहे हैं लेकिन इस सब बातों के पीछे देखे तो बहुत कुछ ऐसा भी नजर आता है जिस तरह आईने के दो रूप होते हैं वैसे ही नारी के भी।
आज के सामाजिक परिवेश में महिलाओं की भूमिका निगेटिव किरदारों द्वारा समाज को एक दूषित माहौल की ओर ले जा रही हैं आज महिलाएं शिक्षित तो है पर संस्कार रहित है।
आज की नारी इंडिया से इंग्लैंड तक का सफर अकेले ही तय कर लेती है उनमें सशक्तिकरण तो बड़ा है लेकिन संस्कृतिकरण नहीं बढ़ा है बल्कि संस्कृतिकरण का ग्राफ घटा ही है यदि हम कहें कि इतनी आजादी मिली है तो उसका कुछ सदुपयोग भी होना चाहिए ।
आज की वेब सीरीज हो या कोई भी डेली सॉप(धारावाहिक) महिलाओं के निगेटिव किरदार को बहुत ही हाईलाइट किया जाता है जिसका हमारे परिवार ,समाज पर उसका गलत प्रभाव पड़ता है ऐसा नहीं है कि नेगेटिव किरदार पहले नहीं थे ।
पहले भी थे घर फोड़ने वाली मन्थरा हो या फिर जिद मनवाने वाली कैकई ऐसे सभी पात्र हमारे समाज से ही निर्मित होते हैं ऐसे नेगेटिव किरदारों ने घरों को फोड़ा ही है जोड़ा नहीं है।
महिला चाहे रील लाइफ हो या रियल लाइफ अपना निगेटिव किरदार बहुत ही बखूबी से निभा कर ना सिर्फ अपनी पहचान और वर्चस्व पाने की लालसा में समाज को एक गलत दिशा में ले जा रही है ।हम सभी इस देश का समाज का हिस्सा है।
इस देश को सही दिशा में ले जाने के लिए एक नारी की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
जब देश गुलाम था तब कई वीरांगनाएं के बलिदानों के कारण हम आज जिस आजादी कि खुली हवा में सांस ले रहे हैं उसे हमें नहीं भूलना चाहिए।
यहां आप उन सभी महिलाओं से परिचित ही होंगे।
हमारे देश की वीरांगनाएं जैसे रानी चन्नम्मा, रानी लक्ष्मी बाई, झलकारी बाई, पन्नाधाय जैसी अन्य अभी और भी है कितने नामों का वर्णन यहां किया जाए लेकिन आज की महिलाओं को उनके बलिदानों को यादकर उससे कुछ अच्छी सीख लेकर कुछ अच्छे कर्म करके प्रसिद्धि पाएं ताकि कि आने वाली पीढ़ी को समाज को देश को सही दिशा में ले जाया जाए ।
हमारा और हमारी पीढ़ी का भविष्य आज की महिलाओं के हाथों में है।
मुझे ऐसा लगता है कि हम आज के परिवेश में महिला किरदारों को एक अच्छी भूमिका में प्रदर्शित करें ताकि एक अच्छा माहौल क्रिएट हो सके।
शराब, सिगरेट के छल्ले उड़ाते अंग प्रदर्शन करती महिलाओं के किरदार घरों-घरों में गांव कस्बों में अपनी पैठ जमा चुके हैं ।यह नेगेटिव किरदार कहीं ना कहीं हमारे समाज की अन्य महिलाओं के मनमस्तिष्क में एक गंदी सोच पैदा कर समाज में दूषित बयार का विस्तार कर रही हैं वैसे ही पर्यावरण की मार हम सबको झेलनी पड़ रही है और ऊपर से आज का दूषित होता वातावरण सभी के मनोमस्तिष्क में बर्फ की तरह जमता जा रहा है।
हमारे देश की महिलाएं आज पैसा कमाने के लिए इतने गर्त तक गिर रही हैं कि वह समय से पहले अपनी अस्मिता के साथ-साथ अपनी पहचान कम बनाती है बिगड़ती ज्यादा है।
आधुनिकता की होड़ में नग्नता को प्रदर्शित कर यह महिलाएं आने वाली महिलाओं के विचारों को खोखला करने में समर्थ है ऐसे में सोचना होगा कि हमारे समाज की इन नन्ही कलियों को कहीं यह निगेटिव किरदारों की बयार उन्हें खिलने से पहले ही ना बिखेर दें।
यह तभी संभव हो पायेगा जब हम समय रहते इस विषय पर जागरूकता से सोच सके।
– वंदना पुणतांबेकर , इंदौर
