एक प्यारी सी लड़की…..

एक प्यारी सी लड़की जो मुझे रोज पकाती है,
पढ़ते समय मुझे वह सबसे ज्यादा सताती है,

कभी-कभी मेरा नाम लेकर के;प्यारी सी
मुस्कुराहट मेरे चेहरे पर वही लाती है

एक प्यारी सी लड़की जो मुझे रोज पकाती है।

कभी मेरी किताबों को पढ़ती है; कॉपियों में लिखती है,

छोटे-छोटे बाल गोल चेहरा एकदम गुड़िया दिखती है,

मेरे डाँट देने पर चुपचाप मुंँह लटका कर बैठ जाती है

एक प्यारी सी लड़की जो मुझे रोज पकाती है।

मेरा जमेट्री बॉक्स खोल कर पेंसिल निकालती है,

निकालती है,देखती है,चुमती है फिर डालती है,

मेरा मूड ऑफ होने पर दिशु कह कर बहलाती है
एक प्यारी सी लड़की जो मुझे रोज पकाती है।

मुझे पढ़ता देख कर उस से रहा नहीं जाता,
कहना बहुत कुछ चाहती है पर कहां नहीं जाता,

कभी चेहरा चूमती है कभी बालो को सहलाती है
एक प्यारी सी लड़की जो मुझे रोज पकाती है।

लेखक – स्वास्तिका शुक्ला , प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश

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