इंदौर की मैराथन दौड़ से छूटे पसीने, हजारों लोग होते रहे परेशान

यात्रियों ,मरीजों और नौकरीपेशा की हुई फजीहत

मैराथन दौड़ से यात्रियों ,मरीजों और नौकरीपेशा की हुई फजीहत

– दो दो तीन घंटे रोक रखा ट्रैफिक
– कुछ धावक बोले – आम जनता को परेशानी से बचाने के लिए भी बने प्लान

आदित्य उपाध्याय,इंदौर । हाथों में बड़े बड़े सूटकेस , गोद में बच्चे , किसी गाड़ी में बुजुर्ग तो किसी में बीमार व्यक्ति । कोई नौकरी पर जाने के लिए निकला तो कोई रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट के लिए निकला । लेकिन शहर में तो मैराथन दौड़ चल रही थी वो भी ढोल धमाकों और डीजे की धुन के साथ । इन जागरूक लोगों को परेशान होते लोगों की पीड़ा नहीं दिखी , दो दो तीन तीन घंटे तो रास्ते रोक दिए, जिम्मेदार कुछ सुनने को तैयार ही नहीं , बस रास्ते रोक दिए ।जिससे हजारों लोगों का रूटीन बिगड़ गया ।किसी की ट्रेन छूट गई तो किसी की फ्लाइट मिस हो गई ।
रेलवे स्टेशन से यात्रियों को अपने गंतव्य तक जाने के लिए जी जान लगाना पड़ गए ।छोटे छोटे बच्चों को गोद में लेकर, हाथों में बड़े बड़े सूटकेस लेकर यात्री खुले रास्ते की तलाश में पैदल ही निकल गए क्योंकि मैराथन दौड़ जो चल रह थी ।

किसी को कोई फक्र नहीं पड़ता-

आज रविवार अलसुबह से ही अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक नागरिक मैराथन दौड़ में शामिल हुए । कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी भी शामिल हुए ।लेकिन किसी भी व्यक्ति के मन में परेशान होते लोगों के प्रति कोई संवेदना नहीं जागी ।लेकिन हां, कुछ देर में सोशल मीडिया पर फोटो वीडियो जरूर वायरल होंगे ।

क्या चंद मिनटों के लिए दौड़ नहीं रोकी जा सकती थी..?
मैराथन दौड़ के कारण हजारों लोग परेशान हुए , लेकिन उनकी परेशानी किसी ने समझना जरूरी नहीं समझा । जब रूट प्लान किया जा रहा था तब भी आम जनता की परेशानी को दूर करने का भी प्लान बनाया जा सकता था ।लोगों का कहना था कि तीन चार घंटे रास्ता रोकने के बजाए कुछ कुछ अंतराल से चंद मिनटों के लिए ही वाहनों को जाने दिया जाता तो 10 – 20 मिनट इंतजार करने में किसी को परेशानी नहीं होती ।

*कई रास्ते बंद, परेशान होते रहे वाहन चालक*-
यह मैराथन दौड़ के कारण एलआईजी , इंडस्ट्री हाउस, पलासिया,गीता भवन, मधु मिलन ,जंजीर वाला, रीगल, इंद्रप्रस्थ, सहित कई रास्ते बंद होने से हजारों लोग परेशान हुए ।

*पैदल जा रहे यात्रियों को देख धावक बोले – यह गलत तरीका है, प्लान बनाना था*-
मैराथन दौड़ में कुछ लोगों ने मानवता का परिचय भी दिया । रास्ते बंद होने कारण बड़े बड़े सूटकेस और हाथों में बच्चों के साथ पैदल जा रहे यात्रियों को देख कई धावक बोले कि हमारे कारण कितने लोगों को परेशानी उठाना पड़ रही है ।यदि ऐसा ही होगा तो आगे से हम किसी भी मैराथन दौड़ का हिस्सा नहीं बनेंगे । जब भी प्लान होगा तो सबसे पहले आम जनता को होने वाली परेशानी के निराकरण का भी प्लान बनवाया जाएगा ।
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