मिथिला का पारंपरिक लोक पर्व सामा-चकेवा महोत्सव का हुआ सामूहिक आयोजन
मेघदूत गार्डन में फैली मिथिला के संस्कृति की सौंधी महक

प्रयास न्यूज, इंदौर। भाई-बहन के स्नेह, मैथिली लोकगीतों की मधुर धुनों और मिट्टी की सुगंध से शहर का मेघदूत गार्डन में दिखा मिथिला के लोक पर्व सामा चकेवा की झलक अवसर था सामा-चकेवा महोत्सव का, जिसे इंदौर सखी बहिनपा मैथिलानी समूह ने परंपरागत उत्साह और आस्था के साथ मनाया। इस दौरान मैथिल समाज की बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लेकर मिथिला की लोक-संस्कृति को सजीव कर दिया।
कार्यक्रम में महिलाओं ने सामूहिक रूप से सामा-चकेवा की प्रतिमाएं मिट्टी से तैयार कीं और उन्हें बांस के डाले में सजा कर पारंपरिक विधि से पूजा की। मैथिली लोकगीतों की मधुर लहरियों के बीच सामा के प्रतीक को एक-दूसरे के हाथों में फेरते हुए ‘चुगला’ और ‘वृंदावन’ का प्रतीकात्मक दहन किया गया।
समूह की प्रमुख ऋतु झा ने बताया कि सामा-चकेवा मिथिला का अत्यंत लोकप्रिय लोक पर्व है, जो सात दिनों तक चलने वाला भाई-बहन के प्रेम और मंगलकामना का प्रतीक उत्सव है। कार्तिक शुक्ल सप्तमी से आरंभ होकर कार्तिक पूर्णिमा तक चलने वाले इस पर्व में बहनें अपने भाइयों की दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा के दिन सामा-चकेवा का विसर्जन किया जाएगा। मैथिलानी समूह की सुषमा झा, श्वेता मिश्रा, सोनी झा ने कहा, सामा-चकेवा न केवल मिथिला की समृद्ध लोक परंपरा को जीवित रखता है, बल्कि यह नई पीढ़ी तक हमारी सांस्कृतिक धरोहर को पहुंचाने का एक सुंदर माध्यम भी है।
सोर्स – प्रेस विज्ञप्ति
