वो कांग्रेस का ब्राह्मण – वो बीजेपी का ब्राह्मण

-राजनीति ने ब्राह्मणों को भी दलों में बांटा

– आश्चर्य, : एकता की बात करने वाले ब्राह्मण भी बंट गए

 

आदित्य उपाध्याय, प्रयास इंदौर । गर्व से कहो हम ब्राह्मण है , जय जय परशुराम । अब मानो यह लगने लगा है की ब्राह्मणों के लिए यह वाक्य सिर्फ दिखावा ही रह गए है । एकता की बात करने वाले ब्राह्मण अब राजनीतिक प्रतिद्वंदिता का शिकार होते दिखाई दे रहे है । कोई कहता है वो कांग्रेसी ब्राह्मण है , तो कोई कहता वो बीजेपी ब्राह्मण है । अब तो आप पार्टी भी आ गई जो ब्राह्मणों को तवज्जो देने में पीछे नहीं है । लेकिन क्या यह उचित है , की ब्राह्मण एकता की बात करने वाले आपस में ही प्रतिद्वंदी हो । फिर वह ब्राह्मण मतदाता किसका साथ दे । कांग्रेस का या भाजपा का…

क्योंकि दोनो ही उम्मीदवार ब्राह्मण समाज के कार्यकर्ता है तो किसका भला करे और किसका बुरा । यह तो तय है की इंदौर में जीत भी ब्राह्मण की होगी और पराजय भी ब्राह्मण की ही होगी । लेकिन इस हार जीत से नुकसान किसे होगा , यह सोचना होगा ।

खैर, जो होना था हो गया…यह राजनीति है , यहां सब जायज है । यह राजनीतिक पार्टियां अक्सर ऐसे ही कार्य करती है ताकि चुनाव लडने वाले जिस भी समाज के हो आपस में बीजेपी और कांग्रेस में बंटे रहे जिससे उनकी राजनीतिक रोटी नहीं , पराठे बनते रहे और संबंधित समाज राजनीतिक पार्टियों में ही उलझा रहे और कहता रहे की , मैं कांग्रेसी ब्राह्मण और मैं भाजपाई ब्राह्मण ।

अनुरोध : आप जिसे भी अपना समर्थन देते हो दे , पर , मतदान जरूर करे , नोटा नही

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