शिवमहापुराण में बताया ,अकाल मृत्यु से कैसे बचे
त्रिवेदी और पटेल परिवार द्वारा आयोजित सद्गुरूनाथ जी महाराज की कथा का समापन

प्रयास न्यूज , इंदौर । सदगुरुनाथ जी महाराज ने लक्ष्मी पूजन के विस्तृत पूजन विधान के साथ कथा का आरंभ कर शिव पार्वती विवाह प्रसंग का चित्रण जिस भव्य भाव से किया की भक्तगण थिरकने को विवश हो गए। शिव जी की बारात में सभी भक्त जोर शोर से नाचे। अंत में विदाई गीत के साथ भक्तो से सजल नयनों से पुराण को विदा किया। तत्पश्चात विशाल भंडार से कार्यक्रम का समापन हुआ । सद्गुरूनाथ जी महाराज द्वारा दिव्य शक्ति पीठ इंदौर (मध्य प्रदेश) में 3 नवंबर से 9 नवंबर तक सायं 4 बजे से 7 बजे तक सौभाग्य श्री शिवमहापुराण कथा का भव्य आयोजन किया जा रहा है। शिव महापुराण कथा के आयोजक हैं राशि त्रिवेदी एवं त्रिवेदी परिवार एवं सद्गुरूनाथ धाम परिवार तथा इस धार्मिक आयोजन के सह आयोजक है। अंकिता मनीष पटेल (सक्षम इवेंट एंड डेकोरेटर्स) एवं पटेल परिवार।

कथा के छठे दिन सद्गुरूनाथ जी महाराज द्वारा शिव महापुराण को आगे बढ़ाते हुए सती चरित्र का वर्णन किया गया। जिसमें उन्होने कहा कि राजा दक्ष ने तप किया, तब उनके यहां माता सती का जन्म हुआ। माता सती ने भगवान शिव शंकर को प्राप्त करने के लिए कठोर तप किया। उनकी तपस्या से खुश होकर भगवान शंकर उनके पति के रूप में प्राप्त हुए। अपने पति भगवान शंकर का अपमान होते देख माता सती को अपने पिता के यज्ञ में ही जाकर भस्म होना पड़ा। सदगुरु जी महाराज द्वारा माता सती एवं भोले बाबा के विरह व्यथा के सजीव चित्रण से भक्तो के नयन सजल हो गए ।
सद्गुरूनाथ जी महाराज ने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में कभी मोह नहीं करना चाहिए। आदमी की मोह ही उसकी सबसे बड़ी दुश्मन है यहां पर हर चीज नश्वर हैं। इसलिए भोलेनाथ का सदा भजन-कीर्तन करो वे ही भवसागर पार करा सकते हैं। कार्यक्रम के दौरान भगवान भोलेनाथ और मां पार्वती के भजनों पर श्रद्धालु जमकर थिरके।
सद्गुरूनाथ जी महाराज ने शिवमहापुराण कथा के दौरान कहा कि जो व्यक्ति अपने गले में रूद्राक्ष को धारण करता है। उसकी कभी अकाल मृत्यु नहीं होती है। गुरूजी ने कहा कि रूद्र का मतलब भगवान भोलेनाथ का नाम होता है और अक्ष का मतलब आंख अर्थात नयन। भगवान शिव की आंखों की जो बूंद पृथ्वी पर गिरी वहीं से रूद्राक्ष की उत्पत्ति हुई। रूद्राक्षा साक्षात भगवान शंकर हैं। इसलिए हर मनुष्य को रूद्राक्ष अवश्य धारण करना चाहिए।
