ऐसे पहचाने मिट्टी के गणेश जी , जानकर होगा आश्चर्य
मिट्टी के गणेश जी ही होते हैं शुद्ध व पर्यावरण अनुकूल -सीईपीआरडी

– वैज्ञानिकों और समाजसेवियों ने बताए अपने अपने अनुभव
प्रयास न्यूज , इंदौर । विघ्न विनाशक श्री गणेश जी की पूजा हेतु पर्यावरण संरक्षण अनुसंधान व विकास केंद्र (सीईपीआरडी) के सचिव डॉ. रमेश मंगल बताते हैं कि मिट्टी के गणेश का जन-जागृति अभियान सतत जारी है।अभियान के संयोजक डॉ. दिलीप वागेला ने बताया कि पर्यावरण अनुकूल मिट्टी की गणेश मूर्तियाँ पूर्णतः बायोडिग्रेडेबल व प्राकृतिक रंगों के उपयोग से रसायन-मुक्त होती हैं। मिट्टी से बनी मूर्तियाँ पानी में शीघ्र घुलनशील होती हैं तथा विसर्जित करने पर झीलों और समुद्रों को साफ करने में मदद करती हैं। नगर निगम द्वारा निर्मित कृत्रिम कुंडों में मूर्ति विसर्जन से प्राकृतिक जल स्त्रोत प्रदूषित होने से बच सकते हैं।
मिट्टी से बनी मूर्ति कैसे पहचानें …
डॉ. अनिल भंडारी बताते हैं कि बाजार में जब हम गणेश जी की मूर्ति खरीदते हैं तो उसकी पहचान सरल है। मिट्टी से बनी प्रतिमा हमेशा पीओपी से बनी मूर्ति की अपेक्षा भारी होगी। साथ ही मिट्टी की मूर्ति ठोस होती है, जबकि पीओपी की मूर्ति अंदर से खोखली होती है। प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी प्रतिमा को उंगली से हल्का ठोकने पर खनक की आवाज भी आती है।
एस एन गोयल बताते हैं कि पीओपी की मूर्तियों पर गहरे और चमकदार रंग से सजावट की जाती है। इसके साथ ही इन मूर्तियों में मिट्टी की मूर्तियों की तुलना में ज्यादा फिनिशिंग किया जाता है।
पर्यावरणविद डॉ. ओ पी जोशी कहते हैं कि जब हम गणेश जी की पूजा पश्चात मूर्ति का विसर्जन करते हैं, तब मिट्टी की मूर्ति होने पर अन्य कहीं विसर्जित करने की आवश्यकता नहीं है। अपने निवास पर ही एक बाल्टी में विसर्जित करें और विसर्जित गणेश जी की मूर्ति का पानी व मिट्टी पौधों, बगीचे व गमलों में डाल दें। यह क्रिया विधि विधान के साथ पर्यावरण सम्मत भी है।
सत्यनारायण मंगल का कहना है कि मिट्टी की मूर्तियां शुद्ध होती है, इसलिए उसमें गणेश जी का वास माना जाता है।
दिनेश जिंदल कहते हैं कि मिट्टी की मूर्ति इको फ्रेंडली होती है तथा इस मूर्ति से पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है।
पर्यावरणविद महेश राजवैद्य कहते हैं कि पीओपी की मूर्ति पानी में घुलनशील नहीं होने से यह नदी या पानी के तल पर जमा हो जाती हैं। इस पानी में हाई कैलशियम उत्पन्न होता है, जिसे पीने से पथरी की शिकायत हो जाती है।
डॉ. संदीप नारूलकर बताते हैं कि पर्यावरण को संरक्षित रखने के लिए इको फ्रेंडली गणेश जी की मूर्ति ही स्थापित करना चाहिए। आप घर पर चंदन, आटा, हल्दी और दुर्वा के गणेश जी भी बना सकते हैं।
भगवान श्री गणेश के जन्म से संबंधित पौराणिक कथा –
पौराणिक कथा के अनुसार एक बार माता पार्वती ने स्नान करने से पहले अपने शरीर के उबटन से एक प्रतिमा का निर्माण किया। माता ने प्रतिमा को अति सुंदर रूप देने के लिए मिट्टी का उपयोग किया और फिर उस प्रतिमा में शिव जी ने अपनी अलौकिक शक्तियों से प्राण डाल दिए। प्रतिमा में प्राण आने के बाद वह प्रतिमा एक बालक के रूप में बन गई। माता पार्वती जी से सृजित मिट्टी के अंश से सज्जित यह बालक भगवान श्री गणेश कहलाए। इसलिए शुद्ध मिट्टी में गणेश जी का वास माना जाता है। पुराणों में यह भी कहा जाता है कि मिट्टी से बने हुए गणेश जी से मां लक्ष्मी भी प्रसन्न होती हैं तथा मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमा की पूजा करने से कई यज्ञों का फल मिलता है। मिट्टी में भूमि, अग्नि, जल, वायु और आकाश इन सभी तत्वों का समावेश होने से गणेश जी में प्राकृतिक शक्ति आ जाती है।
