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डॉ.रंजना_फतेपुरकर

शरद पूर्णिमा का ताज …आज चांदनी चल पड़ी

नीले अम्बर में पूनमका चांद झिलमिला रहा है सितारों के नूर से चांदनीको संवार रहा है घनेरी घटाओं से काजल चुराकर चांदनी की आंखों में लगा रहा है कोहरे की झीनी चूनर से चांदनी का घूंघट सजा रहा है आज चांदनी चल पड़ी है…
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नदी ने सागर से पूछा – क्या तुम किसी की प्यास बुझा सकते हो..?

सागर ... एक लघुकथाइठलाती नदी झूमती,बलखाती बही जा रही थी।कल कल करता नदी का जल जैसे खुशी से छलछला रहा था।किनारे पर कभी वह पेड़ों को,लताओं को भिगोता तो कभी पनिहारिनो की मटकी में प्यास बुझाने का मीठा स्त्रोत बन जाता।    आज नदी…
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