शनि इन भावों में हो तो ये काम न करें

शनि के प्रत्येक भावों में होने का प्रभाव और सावाधानियां बताई गई है। शनि ग्रह के किस भाव में होने से कौन-सा दान नहीं करना चाहिए या कोई कार्य नहीं करना चाहिए। शनि लग्न में व गुरु पंचम में हो तो कभी भी ताम्बे का दान नहीं करें। शनि, आठवें भाव में हो तो भोजन, वस्त्र या जूते आदि का दान न करें। शनि अष्टम भाव में हो तो किसी के लिए मुफ्त आवास का निर्माण न करें। शनि बलवान होने पर शनि की वस्तु शराब दूसरों को न पिलाएं।
शनि यदि पहले खाने में हो तो दगाबाजी और झगड़ालू प्रवृत्ति से बचें। दूसरे खाने में हो तो जुआ, सट्टा, लाटरी के चक्कर में न पड़े। वैराग्य भाव न रखें। तीसरे खाने में पूर्व या दक्षिण दिशा में मकान का प्रवेश द्वार न रखें। दरवाजे के पास पत्थर गढ़ा या रखा हुआ न हो। मकान के आखिरी में यदि अंधेरी कोठरी हो तो उसमें रोशनी के रास्ते न निकालें। चौथे खाने में पराई स्त्री के चक्कर में न रहें। रात में दूध न पिए। पांचवें खाने में मकान न बनवाएं बल्कि बने-बनाए खरीद लें या परदादाओं के मकान में ही रहें। शनि के मंदे कार्य अर्थात जुआ, सट्टा, शराब, वैश्या से संपर्क और ब्याज आदि न करें। छटवें खाने में मकान न बनवाएं। शराब न पिएं। सातवें खाने में पराई स्त्री के मोह में न रहे। आठवें खाने में शनि के मंदे कार्य अर्थात अर्थात जुआ, सट्टा, शराब, वैश्या से संपर्क और ब्याज आदि न करें। नवम खाने में दो से ज्यादा मकान न रखें। अंधेरी कोठरी में रोशनदान या रोशनी के रास्ते न बनाएं। दसवे ंखाने में दूसरों का भला करने की न सोचें। शराब कतई न पिएं। ग्यारहवें खाने में उधार न दें। बारहवें खाने में मकान जैसा बन रहा है वैसा बनने दें उसमें अपनी अक्ल न लगाएं और न ही बनने से रोके। दूसरा घर खाली हो तथा आठवें में अकेला शनि हो तो मंदिर न जाएं। यदि 6, 8, 12 भाव में शत्रु ग्रह हो तथा भाव 2 खाली हो तो भी मंदिर न जाएं। ब्याज लेना, पराई स्त्री से संबंध और शराब पीने से बर्बादी। काका, मामा, सेवक और नौकर से संबंध खराब है तो नुकसान होगा।
