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वंदना पुणतांबेकर

इंतजार …साजन का

इंतजार....अपने साजन का............…..............................यह खिड़की और बारिश की बूंदे।सरसती मदमस्त पवन।कब आओगे, मेरे साजन।तुमने कहा था ना, आओगे इस बार। सूना आंगन, सूने सूने मेरे नयन।कब आओगे ,मेरे साजन।…
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