उसने पत्थर पर कुछ लिखा , शरमा गई लहर, स्वीकार किया प्रेम
" लहर " (लघुकथा) जैसे ही चंचल लहर मचलती साहिल पर आकर पल भर ठिठकती,उसका भीगा सौंदर्य साहिल के हृदय को छू लेता। साहिल ने कई बार रेत पर अपना प्रणय निवेदन लिखा पर वह प्रेम की इबारत या तो पवन का वेग मिटा देता या लहर के स्पर्श…
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