इंदौर। आप मानें या माने लेकिन साढे पांच अरब सालाना की कमाई करने वाले आरटीओ में पड़ रहा कार्ड का टोटा । हालात यह है कि जिम्मेदार भी मिस मैनेजमेंट की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। यही वजह है कि यहां आने वाले लोग परेशान हो रहे हैं। परिवहन आयुक्त से लेकर सीएम तक शिकायत कर रहे हैं, लेकिन सुन वाई कहीं नहीं हो रही है।
उल्लेखनीय है, कि नायता मुंडला आरटीओ कार्यालय सालाना ५५० करोड़ बनाम साढे पांच अरब रुपए राजस्व के रुप में देता है। इसके बाद भी, कभी प्रिंटर की रिबन तो कभी कार्ड नहीं होने से आवेदकों को लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन, ट्रांसफार्मर आदि के कार्ड नहीं मिल रहे हैं। हद तो यह है कि यह समस्या आज-कल की नहीं, बल्कि महिनों से चली आ रही है और इस संबंध में काफी हो हंगामा भी हो चुका है। यह मामला मीडिया की सुर्खियों में भी रहा, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा। महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि मिस मैनेजमेंट होने के बाद भी जिम्मेदार इस ओर कोई ध्यान ही नहीं दे रहे हैं। इसका खामियाजा आम आदमी को भुगतना पड़ रहा है। दिया स्मार्ट चिप कंपनी को नोटिस
परिवहन विभाग में तकनीकी काम का जिम्मा स्मार्ट चिप कंपनी का है। वह कार्ड, रिबन की सप्लाई करती है। बावजूद इसके, पिछले कुछ दिनों से मांग के अनुसार सप्लाय नहीं होने की वजह से परेशानी बढ गई है। बताया जा रहा है कि कुछ चीजें चायना और यूक्रेन से आती है जिसकी सप्लाय प्रभावित है। इस वजह से दिक्कतें बढ गई है। आरटीओ जितेन्द्र रघुवंशी ने कंपनी को नोटिस देकर जवाब मांगा है। साथ ही ग्वालि यर मुख्याल य को भी मामले से अवगत कराया गया है।
रोजाना होते हैं पांच सौ से सात सौ कार्ड जारी
देखा जाए तो आरटीओ से रोजाना ५०० से ७०० कार्ड जारी होते हैं। कार्ड आते भी हैं तो उनकी संख्या नहीं के बराबर होती है। बीते दिनों तीन हजार कार्ड आए, जबकि जरूरत दस हजार की थी। इनमें से भी जो प्रभावी लोग थे, उन्हें यह पहले मिल गए और बाकी के टापते ही रह गए। फिर जो पहले से ही एजेंटों से सेटिंग कर रखते हैं उन्हें यह कार्ड मिल जाते हैं, बाकी फिर कतार में रहते हैें। यह पहली बार नहीं है, ऐसा हर बार होता है। बावजूद इसके अधिकारी समस्या का समाधान नहीं निकाल पा रहे हैं। कार्ड की कमी कब खत्म होगी इसका जवाब भी किसी जवाबदार अधिकारी के पास नहीं है। इधर, लाइसेंस, रिन्युअल, रजिस्ट्रेशन आदि के कार्ड की पैंडेंसी लगातार बढते ही जा रही है।