पीपीपी मोड में लगेगी मशीनें, बाजार से ६० फीसदी कम होगा शुल्क
इंदौर। प्रदेश में पहली बार अब जिला चिकित्सालय में भी एमआरआई की सुविधा मिलेगी। इसके लिए पीपीपी मोड में लगेगी मशीनें और मरीजों को बाजार से साठ फीसदी कम शुल्क देना होगा। इसके लिए तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और संभवत: अगले दो से तीन माह मेें यह सुविधा जिला चिकित्सालय में भी मुहैय्या हो जाएंगी।
उल्लेखनीय है कि अभी प्रदेश के कुछ ही मेडिकल कालेजों में पब्लिक प्रायवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड से यह मशीनें लगाई गई हैं।
यहां पर जांच दरें सेंट्रल हेल्थ गवर्मेंट स्कीम के तहत सीजीएचएस की दरों के आसपास ही हैं। मतलब यह कि अभी निजी अस्पतालों या लैब में एमआरआई जांच के लिए जहां छ: हजार रुपए खर्च करना पड़ते हैं,वहां पर यह जांच महज दो हजार रुपए में कराई जा सकेगी। जिला अस्पतालों में एमआरआई की सुविधा उपलब्ध कराए जाने के लिए स्वास्थ्य आयुक्त एवं प्रबंध संचालक मप्र पब्लिक हेल्थ सप्लाई कार्पोरेशन ने संबंधित जिला अस्पतालों के सिविल सर्जन को पत्र लिखकर इसके लिए जगह चिन्हित करने के लिए कहा है। जगह चिन्हित भी कर ली गई है और अब इसका अवलोकन कर रिपोर्ट देने के लिए बायोमेडिकल इंजीनियरों की ड्यूटी लगाई गई है। इसके बाद ही मशीनें लगाने के लिए टेंडर जारी किए जाएंगे।
प्रदेश के इंदौर सहित पांच जिलों में सिविल हास्पिटल में यह मशीनें लगाए जाने का फैसला लिया गया है। दरअसल, जिला अस्पतालों में ट्रामा यूनिट भी बनाई गई है। कई बार गंभीर मरीज आते हैं, लेकिन एमआरआई की सुविधा नहीं होने की वजह से मरीज को महाराजा यशवंतराव हास्पिटल (एमवायएच)या मेडिकल कालेज अथवा निजी अस्पताल भेजना पड़ता है। ऐसी स्थिति में गोल्डन आवर यूं ही आने-जाने में बरबाद हो जाता है।

