नन्हा परिंदा तूफान से बोला – डाली पर नहीं अपने पंखों पर भरोसा है
"नन्हा परिंदा"(लघुकथा)तूफान को अपने प्रचंड रूप पर बेहद गर्व था।वह सोचता था उसके चलते ही हर पेड़ का पत्ता पत्ता सिहर उठता है,डाली डाली भय से कांप उठती है।आज फिर तूफान का मन हो रहा था तबाही मचाने का।वह सागर के पास से गुजरा,उसे देखते…
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