विष्णुजी जा रहे सोने… कमान शिवजी के हाथ

कर्क संक्रांति पर्व के साथ सूर्य दक्षिणायन हो गया है। आज देवशयन हो जाएगा। यानी भगवान विष्णु योग निद्रा में रहेंगे, जिससे अगले 4 महीनों तक सिर्फ स्नान-दान और पूजा-पाठ का दौर चलेगा। इन दिनों में शादियां, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कामों के लिए मुहूर्त नहीं रहेंगे, लेकिन हर तरह की खरीदारी की जा सकेगी, जिसके लिए कई शुभ मुहूर्त भी हैं। पुरी के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र आषाढ़ (जुलाई) महीने के शुक्लपक्ष की एकादशी पर भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं। इस दिन से चातुर्मास शुरू हो जाता है। इसके बाद सावन (अगस्त), भाद्रपद (सितंबर), अश्विन (अक्टूबर) और कार्तिक (नवंबर) में शुक्ल पक्ष की एकादशी पर देवता जागते हैं और चातुर्मास खत्म हो जाता है। देवशयनी एकादशी यानी आज से ही चातुर्मास शुरू हो हो गए हैं। इसके साथ ही चार महीने तक शादी, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक काम नहीं किए जाएंगे। हालांकि इन दिनों में खरीदारी, लेन-देन, निवेश, नौकरी और बिजनेस जैसे नए कामों की शुरुआत के लिए शुभ मुहूर्त रहेंगे। इस साल भगवान विष्णु 118 दिन योग निद्रा में रहेंगे। इस दौरान संत और आम लोग धर्म-कर्म, पूजा-पाठ और आराधना में समय बिताएंगे। पिछले साल अधिकमास होने से भगवान विष्णु ने 148 दिन क्षीरसागर में आराम किया था। इस बार वे आज से नवंबर तक योग निद्रा की अवस्था में रहेंगे। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक इस अवधि में सृष्टि को संभालने और कामकाज संचालन का जिम्मा भगवान भोलेनाथ के पास रहेगा। इस दौरान धार्मिक अनुष्ठान किए जा सकेंगे पर विवाह समेत मांगलिक काम नहीं होंगे। हिंदू कैलेंडर में आषाढ़ साल का चौथा माह है। आषाढ़ सनातन धर्म में धार्मिक माह भी माना गया है। इस माह में भगवान विष्णु, भगवान शिव व मां दुर्गा की गुप्त नवरात्र के दौरान पूजा की जाती है। माना जाता है कि इसी महीने में सभी देवी देवता विश्राम के लिए जाते हैं। वहीं भारत में इस समय काफी बारिश होने के कारण इस माह को वर्षा ऋतु का महीना भी कहा जाता है। पुरी के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र बताते हैं कि चतुर्मास की शुरुआत हिंदू कैलेंडर के आषाढ़ माह से होती है।
डॉ. मिश्र बताते हैं कि सूर्य के कर्क राशि में आते ही दक्षिणायन शुरू हो गया है, जो कि अगले 6 महीने तक रहेगा। इसके बाद 14 जनवरी को सूर्य के मकर राशि में आने के बाद उत्तरायण काल शुरू हो जाएगा। दक्षिणायन में सूर्य कर्क से मकर तक 6 राशियों में होकर गुजरता है। इस दौरान पितरों की पूजा और स्नान-दान का बहुत महत्व होता है। दक्षिणायन को देवताओं का मध्याह्न काल भी कहा जाता है। इसलिए इस समय में गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य मांगलिक काम नहीं किए जाते हैं। दक्षिणायन को नकारात्मकता का और उत्तरायण को सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। इसीलिए कहते हैं कि उत्तरायण उत्सव, पर्व एवं त्योहार का समय होता है और दक्षिणायन व्रत, साधना एवं ध्यान का समय रहता है। दक्षिणायन में विवाह, मुंडन, उपनयन आदि विशेष शुभ कार्य निषेध माने जाते हैं। इस दौरान व्रत रखना, किसी भी प्रकार की सात्विक या तांत्रिक साधना करना भी फलदायी होती हैं। इस दौरान सेहत का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवशयनी एकादशी से चार माह तक भगवान विष्णु विश्राम करते हैं। भगवान विष्णु का विश्राम कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन पूरा होता है। इस समय को चार्तुमास भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान सृष्टि का संचालन भगवान शिव करते हैं। भगवान शिव का पावन माह सावन भी इस दौरान आता है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल 25 जुलाई से 22 अगस्त तक सावन का पावन महीना रहेगा। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार कुछ राशियों पर भोलेनाथ की हमेशा विशेष कृपा रहती है। कुछ राशियों पर भी भोलेनाथ की कृपा रहेगी।

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